(यह लेख अराजनीतिक है।)
कॉकरोच पृथ्वी पर पाए जाने वाले सबसे पुराने जीवों में से
एक है। डायनासोर जैसे विशाल प्राणी समय के साथ समाप्त हो गए, लेकिन कॉकरोच आज भी जीवित है और हमारे घरों
में खुलेआम घूमता दिखाई देता है। कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रहने की उसकी
क्षमता अद्भुत है। खाने‑पीने के मामले में भी वह बिल्कुल चुनिंदा नहीं होता;
जो कुछ भी सामने आता है, उसी पर जी लेता है। "जिस घर में उसे आश्रय मिलता है, उस घर के प्रति उसका
कोई लगाव या निष्ठा नहीं होती; उल्टे वह घर का भोजन,
अनाज, कपड़े, कागज़ जैसी
चीज़ें कुतरकर नष्ट करता है और गंदगी व बीमारी फैलाता है। इसलिए उसका नियंत्रण
करना ज़रूरी हो जाता है।
बरसात के मौसम की नमी से कॉकरोच सहित कई कीटों की संख्या
बढ़ जाती है। दीपावली के आगमन से पहले हम अपने घर की पूरी सफाई करते हैं। "हम घर में बीमारी और रोग फैलाने वाले
कॉकरोच तथा अन्य कीटों को हीट स्प्रे से नष्ट
करते हैं।" बरसात में जमा हुआ कचरा और उसमें छिपे हुए ये उपद्रवी
कीटों को नष्ट करके हम अपना घर चमकदार बनाते हैं। रसोईघर के कोने, अलमारियों के पीछे का हिस्सा, नलों के पास की जगह और नालियों के मुहाने पर विशेष ध्यान देने से ये कीट
दोबारा सिर नहीं उठाते।
इस तरह घर की सफाई करके हम घर में स्वस्थ और प्रसन्न
वातावरण बनाने का प्रयास करते हैं। उसके बाद घर की सजावट, रंगाई‑पुताई और दिये जलाकर हम दीपावली का
उत्साहपूर्वक स्वागत करते हैं। दीपावली का असली आनंद केवल घर को रोशन करने में
नहीं, बल्कि उसे स्वच्छ, सुरक्षित
और स्वास्थ्यप्रद बनाने में भी है।
स्वच्छ घर, स्वस्थ
परिवार और प्रकाशमय वातावरण- यही है सच्ची दीपावली।
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