पतझड़ की रातों में
वासंती ख़्वाब देखता हूँ l
टेसू फूलोंकी आग में
आज भी जलता हूँ l
अधूरे सपनोंकी
टीस बड़ी गहरी हैl
खुशियों के पलोंकी
यादें बड़ी धुंधली हैl
मिट्टी में मिलकर भी
जीने की आस हैl
सपनोंको पूरा करने की
चाह अभी बाकी हैl
ओम् नमो नमो नम: स्वच्छता देवताय नम: प्रार्थना पहले शुभ्र वस्त्र धारण करें फिर डिजाईनर झाडू खरीदें मिडिया को भी आमंत...
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