शुक्रवार, 2 जनवरी 2026

गिरगिट और नेता: टोपी बदलने की कला


कभी जंगल में रहने वाले एक गिरगिट ने शहर जाकर लोगों को अपना रंग बदलने का कौशल दिखाकर वाहवाही पाने का विचार किया। वह पास के शहर गया। वहाँ उसने एक सरकारी बंगले में एक आदमी को देखा, जो सिर पर सफेद टोपी लगाए कुर्सी पर बैठा था।

गिरगिट उस आदमी के पास गया और बोला, “मैं जंगल में रहने वाला गिरगिट हूँ। मुझे रंग बदलने की कला आती है। मैं जिस पेड़ या फूल पर बैठता हूँ, उसी रंग में घुल-मिल जाता हूँ।”

गिरगिट ने आगे कहा, “मैं आपको अपनी कला दिखाता हूँ।”
वह हरे पत्तों पर बैठा—वह हरा हो गया।
वह लाल फूल पर बैठा—वह लाल हो गया।
इस तरह गिरगिट ने अलग-अलग रंग बदलकर अपनी कला उस आदमी को दिखाई।

गिरगिट ने पूछा, “क्या तुम मेरी तरह रंग बदल सकते हो?”
वह आदमी हँसते हुए बोला, “इसमें क्या खास है? मैं तो इसी कुर्सी पर बैठे-बैठे रंग बदल सकता हूँ। तुम बस मेरी टोपी की ओर देखो।”

गिरगिट ने उस आदमी की टोपी की ओर देखा।
क्षण भर में टोपी का रंग हरा हुआ, फिर लाल, फिर नीला और फिर भगवा। अंत में वह फिर से सफेद हो गया।

वह आदमी इतनी सहजता से रंग बदल रहा था कि गिरगिट चकित रह गया।
गिरगिट बोला, “आज तक मैंने किसी इंसान को रंग बदलते नहीं देखा। आप वास्तव में कौन हैं?”

वह आदमी शांत स्वर में बोला, “मैं हमेशा सत्ता की कुर्सी पर विराजमान रहता हूँ। इसलिए मैंने टोपी का रंग बदलने की कला आत्मसात कर ली है।”

उस आदमी के चरणों में प्रणाम करते हुए गिरगिट बोला, “गुरुदेव, क्या आप मुझे यह कला सिखाएंगे?

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