हमारे देश में आज भी गाँव देहात के लोग भी चेहरे पर मुस्कान लाकर राम-राम, जय रामजी, राधे-राधे कहते हुए एक दूसरे का अभिवादन करते हैं। श्रीसार्थ दासबोध समर्थ रामदास स्वामी कहते है, छोटे-बड़े सभी को मिलने पर आदर के साथ नमस्कार करना चाहिए। समर्थ कहते हैं, नमस्कार करने में जेब से कोई पैसा खर्च नहीं होता, अत: नमस्कार करने में कंजूसी नहीं करनी चाहिए। नौकरी, व्यापार-धंधे सहित सभी सांसरिक कामकाज में नमस्कार करने से फ़ायदा होता है। संत महात्माओंकों नमस्कार करने से पारमार्थिक लाभ भी प्राप्त होते हैं। नमस्कार करने से गली-मोहल्ले के सभी लोग, दुकानदार, रेहड़ी वाले, सब्जी वाले, नाम से शायद न जाने पर चेहरे हमें से जरूर पहचानने लगते हैं। जिसका हमें निश्चित तौर पर फ़ायदा होता है।
रविवार, 29 जनवरी 2023
वार्तालाप (2) : नमस्कार करने के लाभ
इसका एक उदाहरण। एक पुरानी घटना है, उस समय हमारी कॉलोनी में पक्की सड़कें नहीं थीं। रिक्शा लेने या ऑफिस जाने के लिए जनकपुरी सी-1 के बस स्टॉप तक पैदल ही जाना पड़ता था। कुछ रेहड़ी-पटरी वाले वहां फल और सब्जियां इत्यादि बेचते थे। मैं रोज उन्हे आते-जाते नमस्ते करता था। कभी-कभी उनसे फल और सब्जियां भी खरीद लेता था। एक दिन मैं अपनी डेढ़ साल की बेटी को साथ लिए जनकपुरी सी-1 बस स्टैंड के पास रिक्शा से उतरा। तेज रफ्तार से आते एक कार ने रिक्शा को टक्कर मार दी। रिक्शा का पिछला पहिया टेढ़ा हो गया और रिक्शा भी क्षतिग्रस्त हो गया। कार चालक कार से बाहर निकला और रिक्शा चालक पर भड़क गया, मेरी कार की हेड लाइट टूट गई है, नुकसान की भरपाई कौन करेगा कहते हुए उसने रिक्शा चालक पर हाथ उठाया। मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और कहा यह तुम्हारी गलती है, तुम्हें रिक्शेवाले को नुकसान भरपाई देनी चाहिए। पहले तुझे ही नुकसान भरपाई देता हूँ, कहते हुए उसने मुझ पर हाथ उठाया। खबरदार साहब पर हाथ उठाया तो.... बोलते हुए सड़क पर बैठे फल विक्रेता तुरंत मेरी सहायता के लिए आए। पल भर में स्थिति बदल गई। कार चालक ने परिस्थिति भाँपते हुए चुपचाप रिक्शेवाले को मरम्मत का खर्चा दिया। आज भी सोचता हूँ यदि मैंने उन्हें प्रणाम न किया होता तो क्या वे मेरी सहायता के लिए आते? शायद रिक्शेवाले के साथ-साथ मेरी भी पिटाई हो जाती। सारांश बिना हिचक छोटे बड़े सभी को आदर के साथ नमस्कार करना चाहिए। संकट के समय न जाने कौन हमारी मदत को आजाए।
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
मराठी ब्लॉग
लोकप्रिय पोस्ट
-
[रामसेतु के बारे में अनेक भ्रम विद्यमान है. इन्ही भ्रमों को दूर करने के लिए प्रस्तुत लेख में वाल्मीकि रामायणानुसार श्री राम ने सम...
-
समाज समलेंगिकता को एक विकृती मानता हैं तथा उसका निषेध करता है परंतु आज समलेंगिकता को कानूनी रूप से जायज करार देने की मांग तथाकथित बुद...
-
बचपन के दिन याद आते हैं. मां संध्या के समय भगवान के सामने दिया जलाती थी. साथ ही हम बच्चे जोर- जोर से शुभम करोति कल्याणं, आरोग्यं सुख-संपद...
-
जनकपुरी के डिस्ट्रीक्ट पार्क में चार 'बूढ़े' पथराई आँखोंसे कर रहे थे इन्तजार मौत का. ल...
-
सत्यवान कार्यालय में वह ख़ास फाइल पढ़ रहा था . अचानक हाल ही में निकली अकल दाढ़ में दर्द होने लगा. जैसे - जैसे वह फाइल के पन्ने पलटता ...
विशिष्ट पोस्ट
अभियान स्वच्छता
ओम् नमो नमो नम: स्वच्छता देवताय नम: प्रार्थना पहले शुभ्र वस्त्र धारण करें फिर डिजाईनर झाडू खरीदें मिडिया को भी आमंत...


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें